खाद्य और कृषि संगठन (FAO) तथा विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने जारी की हंगर हॉटस्पॉट रिपोर्ट 2021 - TopTak Study


हंगर हॉटस्पॉट रिपोर्ट 2021

हाल ही में खाद्य और कृषि संगठन तथा विश्व खाद्य कार्यक्रम ने 'हंगर हॉटस्पॉट्स अगस्त - नवंबर 2021 (Hunger Hotspots August to November 2021) नाम से एक रिपोर्ट जारी की। मई, 2021 में जारी वर्ष 2021 की ग्लोबल फूड क्राइसिस (Global Food Crises Report) रिपोर्ट में पहले ही तीव्र खाद्य असुरक्षा की चेतावनी दी गई थी।

प्रमुख हंगर हॉटस्पॉट

इथियोपिया, मेडागास्कर, दक्षिण सूडान, उत्तरी नाइजीरिया और यमन उन 23 देशों में शामिल हैं जहां अगस्त से नवंबर, 2021 तक खाद्य असुरक्षा की स्थिति तीव्रता से और अधिक खराब जाएगी। इथियोपिया और मेडागास्कर विश्व के सबसे ज्यादा भूखमरी वाले हॉटस्पॉट माना जा रहा है।

इथियोपिया एक विनाशकारी खाद्य आपातकाल का सामना कर रहा है जिसका कारण टाइग्रे क्षेत्र में चल रहा संघर्ष है। इस बीच दक्षिणी मेडागास्कर में 40 वर्षों में सबसे भीषण सूखे के कारण वर्ष 2021 के अंत तक 28,000 लोगों के अकाल जैसी स्थिति का सामना करने की आशंका है।

 खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO)

  • खाद्य और कृषि संगठन (FAO) संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष एजेंसी है। जो भूख को समाप्त करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व करती है। 

  • प्रतिवर्ष विश्व में 16 अक्तूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। खाद्य और कृषि संगठन की स्थापना सन् 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा की गई थी।

  • यह संयुक्त राष्ट्र के खाद्य सहायता संगठनों में से एक है। जो रोम (इटली) में स्थित है। इसके अलावा विश्व खाद्य कार्यक्रम और कृषि विकास के लिये अंतर्राष्ट्रीय कोष (IFAD) भी इसमें शामिल हैं।

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP)

  • विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) एक अग्रणी मानवीय संगठन है जो आपात स्थिति में लोगों के जीवन को बचाने और परिवर्तन हेतु खाद्य सहायता प्रदान करता है, यह पोषण स्तर में सुधार करने एवं लचीलापन लाने हेतु समुदायों के साथ मिलकर कार्य करता है।

  • WFP को भुखमरी समाप्त करने के प्रयासों के लिये वर्ष 2020 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।

  • इसकी स्थापना वर्ष 1961 में खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) तथा संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा अपने मुख्यालय रोम, इटली में की गई थी। 

  • WFP आपातकालीन सहायता के साथ-साथ पुनर्वास एवं विकास सहायता पर भी केंद्रित है। इसका दो तिहाई काम संघर्ष प्रभावित देशों में होता है, जहाँ अन्य जगहों की तुलना में लोगों के तीन गुना कुपोषित होने की संभावना है।

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